Property Rules : किराए पर मकान देने वाले हो जाएं सावधान, जानिए कितने साल बाद मालिक बन जाता है किराएदार।

Rules Of Landlord And Tenant : बहुत से लोग अपनी आमदनी को बढ़ाने के लिए अपने घर, दुकान या फिर ऑफिस को किराए पर लगा देते हैं। आपको बता दे कि किराए पर प्रॉपर्टी देने को लेकर भी कई तरह के नियम (Property Rules) बनाया हुआ है। आज की इस खबर में हम आपको यह कैसे ही नियम के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके तहत किरदार आपके मकान का मालिक बन सकता है। आई खबर में जानते हैं कि कितने दिन बाद किराएदार बन सकता है आपके मकान का मालिक।

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Property Rules : किराएदार कितने दिन बाद बन सकता है मकान का मालिक।

किराए पर घर और दुकान देखकर लोग लाखों रुपए कमाते हैं। एक्स्ट्रा इनकम के चक्कर में लाखों लोग किराए पर मकान लगते हैं। खासतौर पर बड़े शहरों और महानगरों में हाउस रेंट (House Rent) से लोगों को सबसे ज्यादा आमदनी होती है। लेकिन, किराए के इस खेल में खतरा भी बना हुआ रहता है, सबसे बड़ा रिस्क होता है संपत्ति पर कब्जे का डर।

आपको बता दे की भारत में प्रॉपर्टी को किराए पर देने के लिए कुछ कानूनी नियम (Rules For Renting Out Property) और प्रक्रियाएं हैं। यहां तक कि अगर किलेदार बड़ा सटक संपत्ति पर रह रहा है, तो वह मालिक बन सकता है, लेकिन इसका भी प्रावधान थोड़ा कठिन है पर ऐसे बिल्कुल भी नहीं है कि ऐसा नहीं हो सकता है। इसीलिए हम आपको प्रॉपर्टी किराए पर देने के नियमों के बारे में जानकारी देने वाले हैं।

इसके साथ ही बताएंगे कि आप कैसे अपनी प्रॉपर्टी को किरदार के कब्जे करने से बचा सकते हैं। इसके लिए आपका प्रॉपर्टी किराए पर देने से पहले कौन-कौन से कागजी कर्ज में पूरी करा लेना चाहिए।

दुकान, मकान किराए पर देने के सामान्य नियम

मकान मालिक और किरदार के बीच एक लिखित किराएदार अनुबंध होना चाहिए, जिसमें किराया का भुगतान की विधि, अवधि, मरम्मत की जिम्मेदारी इत्यादि की जानकारी हो। किराएदार को उसे संपत्ति का उपयोग करने का अधिकार मिलता है, लेकिन संपत्ति के मालिक के अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता है। मकान मालिक समय-समय पर किराया भी बढ़ा सकता है, लेकिन यार राज्य के नियम के अनुसार होना चाहिए।

जमीन पर रहते हुए किरदार कैसे बन सकता है प्रॉपर्टी का मालिक?

भारतीय प्रॉपर्टी कानून (Property Rules) के तहत, अगर किरदार ने किसी संपत्ति को की निश्चित समय तक कब्जे पर रखा हुआ है और मकान मालिक ने इसे नहीं चिन्ह की कोशिश किया है, तो कुछ राज्यों में किरदार को इस संपत्ति का मालिक बनने का अधिकार मिल जाता है। यहां प्रक्रिया विपरीत कब्ज के तहत होती है, जिसे भारतीय कानून में दी गई कुछ विशेषता स्थिति के तहत मान्यता प्राप्त है।

अगर कोई भी व्यक्ति किसी भी संपत्ति पर अनाधिकृत रूप से कब्जा किए हुए हैं और यह कब्जा कुछ सालों तक चलता रहता है, तो वह व्यक्ति मालिक के अधिकार का दावा कर सकता है। यहां प्रक्रिया सामान्यत 12 साल तक की अवधि पूरा होती है, अगर मकान मालिक संपत्ति पर कब्जा करने का कोई प्रयास नहीं करता है और किरदार का कब्जा लगातार बना हुआ रहता है।

नियम का क्या-क्या है शर्त?

कब्जी की स्थिति सार्वजनिक, स्पष्ट रूप से रखा जाना चाहिए। जो कब्जा हुआ है वह निजी और बिना किसी बाधा के होना चाहिए। यह समय सीमा 12 वर्ष या फिर कभी-कभी 30 वर्ष, निर्भर राज्य कानून पर तक हो सकती है।

हालांकि यह नियम सभी मामलों में लागू नहीं होता है और अगर मकान मालिक ने पहले ही कोर्ट में संपत्ति पर अपना दावा किया हुआ है या कानूनी कार्यवाही किए हुए हैं, तो इस सिद्धांत का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

किराएदार से संबंधित कानूनी विवाद

और मकान मालिक के बीच कोई भी विवाद हो जाता है, तो इस न्यायालय में समाधान किया जा सकता है। इस संदर्भ में, किरदार को पहले कोर्ट में एक अधिकार प्राप्त करना होगा। कुछ राज्यों में रेंट कंट्रोल एक्ट लागू होता है, जो कि किरदार और मकान मालिक के अधिकारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है और इसमें अनुशासन भी लाता है।

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